अल्जाइमर एक गंभीर मस्तिष्क रोग है जो मुख्य रूप से बुजुर्गों में पाया जाता है। यह धीरे-धीरे दिमाग की कोशिकाओं को नष्ट करता है और याददाश्त, सोचने की क्षमता और निर्णय लेने की शक्ति को कम करता है।
शुरुआत में यह बीमारी छोटी-छोटी बातों को भूलने से शुरू होती है, लेकिन समय के साथ यह बढ़ती जाती है और व्यक्ति के पूरे शरीर पर प्रभाव डालने लगती है।
अल्जाइमर को केवल भूलने की समस्या मानना सही नहीं है, क्योंकि इसका असर दिमाग के अलावा शरीर के कई अन्य अंगों पर भी दिखाई देता है।
सबसे पहले और सबसे बड़ा असर दिमाग पर पड़ता है। अल्जाइमर में न्यूरॉन्स (दिमाग की कोशिकाएँ) धीरे-धीरे कमजोर होकर काम करना बंद करने लगती हैं। इसका सीधा असर सोचने, याद रखने और सीखने की क्षमता पर होता है।
मरीज को शब्द याद करने में दिक्कत आती है, बात को समझने में कठिनाई होती है और कभी-कभी आसपास के लोगों या जगहों को पहचानने में भी परेशानी होती है।
यही असर धीरे-धीरे आँखों और सुनने की क्षमता तक पहुँचता है। मरीज चीज़ें साफ नहीं देख पाता या सही से पहचान नहीं पाता, जिससे दैनिक जीवन में और कठिनाई बढ़ जाती है।
बीमारी बढ़ने पर केवल दिमाग ही नहीं, बल्कि शरीर की गतिविधियाँ भी प्रभावित होने लगती हैं। मांसपेशियों में कमजोरी आने लगती है, जिससे मरीज का चलना-फिरना मुश्किल हो जाता है। कई बार संतुलन बिगड़ जाता है और गिरने की संभावना बढ़ जाती है।
धीरे-धीरे मरीज को रोज़मर्रा के काम जैसे कपड़े पहनना, नहाना या खाना खाने जैसे काम भी कठिन लगने लगते हैं। इसके अलावा अल्जाइमर का असर पाचन और खाने-पीने की प्रक्रिया पर भी पड़ता है। मरीज को निगलने में परेशानी होती है और कई बार भूख कम लगती है, जिससे वजन घटने लगता है और शरीर कमजोर हो जाता है।
अल्जाइमर नींद के पैटर्न को भी बिगाड़ देता है। मरीज को नींद आने में कठिनाई होती है या बार-बार नींद टूट जाती है। यह समस्या धीरे-धीरे मानसिक और शारीरिक थकान को और बढ़ा देती है।
इसके अलावा लंबे समय में यह बीमारी हृदय और रक्त प्रवाह पर भी असर डाल सकती है। शरीर का तालमेल बिगड़ने से कई अन्य स्वास्थ्य समस्याएँ भी सामने आने लगती हैं।
कुल मिलाकर अल्जाइमर केवल दिमाग की बीमारी नहीं है, बल्कि यह इंसान की पूरी जीवनशैली और शरीर की कार्यप्रणाली को प्रभावित करता है।
अल्जाइमर एक धीमी लेकिन गंभीर बीमारी है जो दिमाग से शुरू होकर पूरे शरीर तक असर करती है। यह याददाश्त को कमजोर करने के साथ-साथ आँखों, मांसपेशियों, नींद और यहां तक कि खाने-पीने की क्षमता को भी प्रभावित करती है।
अगर समय रहते लक्षणों को पहचाना जाए और सही देखभाल मिले तो मरीज को लंबे समय तक आराम और सामान्य जीवन जीने में मदद मिल सकती है।
डॉ नवीन तिवारी
परामर्श न्यूरोलॉजिस्ट।